दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर जारी प्रचार अभियान का शोर सोमवार को थम गया है। दिल्ली में विधानसभा की सभी 70 सीटों पर 5 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। दिल्ली में वैसे तो मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी बनाम भाजपा का ही माना जा रहा है। लेकिन कई विधानसभा सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने दिल्ली की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है।
दिल्ली का विधानसभा चुनाव, इस बार कई मायनों में अनोखा रहा। भ्रष्टाचार, शीशमहल, यमुना के पानी में जहर, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या घुसपैठिए, घोटालों की लंबी लिस्ट से लेकर दिल्ली का सबसे बड़ा गुंडा कौन जैसे तमाम मुद्दों पर दिल्ली के तीनों राजनीतिक दल चुनाव प्रचार अभियान के दौरान एक-दूसरे को घेरते नजर आए।
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दिल्ली में एक तरफ आम आदमी पार्टी है, जो लगातार चौथी बार दिल्ली में सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ रही है। दूसरी तरफ भाजपा है जो देश की राजधानी दिल्ली में 27 साल के अपने वनवास को खत्म करना चाहती है। वहीं दिल्ली की चुनावी रेस में तीसरे नंबर की पार्टी माने जाने वाली कांग्रेस इस बार किंग मेकर के रूप में उभरना चाहती है।

अब दिल्ली के डेढ़ करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को यह तय करना है कि वो देश की राजधानी में किसकी सरकार बनाने जा रही है। लेकिन तमाम राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि अगर कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरा तो इसका सीधा खामियाजा अरविंद केजरीवाल की पार्टी को उठाना पड़ सकता है।














